![]() |
| मोहिनी एकादशी |
कब रखें मोहिनी एकादशी व्रत
असमंसज का कारण ये है कि 22 मई को सूर्योदय पर एकादशी तिथि नहीं होगी। पर 23 मई को सूर्योदय के कुछ समय बाद ही एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी.
पं गोपाल आचार्य जी ने बताया कि सूर्योदय की तिथि होने के कारण 23 मई को व्रत रखा जाना चाहिए। उदयव्यापनी तिथि से ही व्रत रखना उत्तम माना गया है।
मान्यता है कि जो भी जातक यह व्रत करता है उसे सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। इस बार यह व्रत 23 मई को पड़ रहा है।
जिस दिन श्रीहरि ने मोहिनी का रूप धारण किया था वह तिथि वैशाख मास की शुक्ल एकादशी थी। इसी कारण से इस तिथि को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन विष्णुजी के मोहिनी रूप की भी पूजा- अर्चना का विधान है।
मोहिनी एकादशी व्रत को लेकर कथाएं
भगवान विष्णु के अनेक रूपों में से एक रूप है मोहिनी रूप। जिसे उन्होंने समुद्र मंथन के बाद प्रदर्शित किया था। इसी स्वरूप से उन्होंने अमृत को असुरों से बचाया था। कथा मिलती है कि समुद्र मंथन के दौरान देव-दानवों के बीच अमृत कलश को लेकर घमासान युद्ध छिड़ गया। तब भगवान विष्णु ने सुंदर स्त्री मोहिनी का रूप धारण किया। जिसपर असुर मोहित हो उठे। तब श्रीहरि ने देवताओं को अमृत पान कराया। इससे सभी देवता अमर हो गए और असुरों का नाश हुआ। इस दिन लोग भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं
मोहिनी एकादशी को लेकर कथा है कि एक बार युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी की कथा क्या है? उन्होंने निवेदन किया कि हे माधव कृपा करके व्रत की विधि भी विस्तारपूर्वक बताएं।
इसपर श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं जो कथा आपसे कहने जा रहा हूं, इसे गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम से कही थी। कथा इस प्रकार है कि एक बार श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से पूछा कि हे गुरुदेव, ऐसा कोई ऐसा व्रत बताइए, जिससे समस्त पाप और दु:ख का नाश हो जाए। तो गुरुदेव ने मोहिनी एकादशी के व्रत को बताया। तब श्रीराम ने इस व्रत को रखा था और तब उनके कष्टों का निवारण हुआ।
निर्मल मन से यदि कोई मोहिनी एकादशी का व्रत करे तो विष्णुजी उसके सभी दु:खों को दूर करते हैं। यह व्रत मोक्ष दिलाता है। साथ ही यह साधक को रोगमुक्त भी बनाता है। इसलिए व्रत करने के बाद जरूरतमंदों, गरीब ,असहाय को यथाशक्ति दान दें, भूखे व्यक्तियों को भोजन कराएं। इससे जाने-अंजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही दान के बाद श्रीविष्णु की प्रतिमा या फोटो के सामने जाने अनजाने हुए पापों के लिए क्षमा प्रार्थना जरूर करें।
पं गोपाल आचार्य
राधा वैली मंदिर
मथुरा

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें