गुरुवार

मथुरा वृंदावन टूर पैकेज 2026 | Govind Tour & Travels

 

मथुरा वृंदावन टूर पैकेज 2026 – 2 दिन, 3 दिन और 4 दिन की ब्रज यात्रा

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क्या आप भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं? Govind Tour & Travels के साथ अपनी मथुरा-वृंदावन यात्रा को आरामदायक और यादगार बनाइए। हमारी यात्रा सेवाओं में प्राइवेट कार, होटल और रिसॉर्ट में ठहरने की सुविधा तथा ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा शामिल की जा सकती है।  contact number 9997026537

इस ब्लॉग में हम आपको मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव की यात्रा का पूरा कार्यक्रम बताएंगे।

1. मथुरा-वृंदावन में घूमने के प्रमुख स्थान

Mathura Vrindavan Most famous temples in Uttar Pradesh you must visit
Shri Krishn janm sthan

1. श्री कृष्ण जन्मभूमि

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा का प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

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2. द्वारकाधीश मंदिर

मथुरा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक, जहां भगवान द्वारकाधीश के दर्शन के साथ ब्रज की धार्मिक संस्कृति का अनुभव मिलता है।

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3. बांके बिहारी मंदिर

वृंदावन का अत्यंत प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मंदिर। त्योहारों और सप्ताहांत में यहां श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ हो सकती है।

Prem mandir

4. प्रेम मंदिर

सफेद संगमरमर से निर्मित सुंदर मंदिर, जो अपनी भव्य वास्तुकला और शाम की रोशनी के लिए प्रसिद्ध है।

Krishna Balaram Mandir Vrindavan Timings, History, Entry Fee, Aartie Timings

5. इस्कॉन मंदिर

श्रीकृष्ण-बलराम मंदिर में भजन, कीर्तन और भक्तिमय वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।

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6. निधिवन

वृंदावन का प्रसिद्ध पवित्र स्थल, जो श्रीराधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मान्यताओं के लिए जाना जाता है।

2. मथुरा-वृंदावन 2 दिन का टूर पैकेज

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पहला दिन – मथुरा और गोकुल

  • मथुरा जंक्शन या मथुरा बस स्टैंड से पिकअप

  • श्री कृष्ण जन्मभूमि

  • द्वारकाधीश मंदिर

  • विश्राम घाट

  • गोकुल

  • रमण रेती

  • ब्रह्मांड घाट

  • चिंताहरण महादेव

  • होटल या रिसॉर्ट में चेक-इन

दूसरा दिन – वृंदावन दर्शन

  • बांके बिहारी मंदिर

  • राधा वल्लभ मंदिर

  • राधा रमण मंदिर

  • निधिवन

  • केशी घाट

  • इस्कॉन मंदिर

  • प्रेम मंदिर

यात्रा पूरी होने पर मथुरा जंक्शन या निर्धारित स्थान पर ड्रॉप की सुविधा बुकिंग के अनुसार रखी जा सकती है।

3. मथुरा-वृंदावन 3 दिन का टूर पैकेज

21 km Govardhan Parikrama Route: A Journey of Devotion

तीन दिन का पैकेज उन परिवारों के लिए अच्छा विकल्प है, जो मथुरा-वृंदावन के साथ गोवर्धन और बरसाना भी घूमना चाहते हैं।

पहला दिन: मथुरा, श्री कृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर, विश्राम घाट और गोकुल।

दूसरा दिन: गोवर्धन, दानघाटी मंदिर, गोवर्धन परिक्रमा, बरसाना राधारानी मंदिर और नंदगांव।

तीसरा दिन: वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर, निधिवन, इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर।

गोवर्धन परिक्रमा के दौरान स्थानीय प्रतिबंधों के कारण कार की पहुंच सीमित हो सकती है। आवश्यकता के अनुसार रिक्शा की व्यवस्था और उसका खर्च यात्रियों द्वारा वहन किया जाएगा।

4. मथुरा-वृंदावन 4 दिन की संपूर्ण ब्रज यात्रा

Barsana- Immerse Yourself in the Colors of Mathura | Incredible India

अगर आप ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों को आराम से घूमना चाहते हैं, तो चार दिन का पैकेज बेहतर विकल्प हो सकता है।

दिन

यात्रा कार्यक्रम

पहला दिन

मथुरा जन्मभूमि, द्वारकाधीश, विश्राम घाट और गोकुल

दूसरा दिन

गोवर्धन, दानघाटी, बरसाना और राधारानी मंदिर

तीसरा दिन

नंदगांव, छटीकरा चार धाम मंदिर और वृंदावन के प्रमुख मंदिर

चौथा दिन

बांके बिहारी, राधा वल्लभ, निधिवन, इस्कॉन और प्रेम मंदिर

यह कार्यक्रम ट्रैफिक, मंदिरों के दर्शन समय और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था के अनुसार बदला जा सकता है।

5. मथुरा-वृंदावन टूर पैकेज की कीमत

Govind Tour & Travels में पैकेज की कीमत यात्रियों की संख्या, यात्रा के दिनों, होटल के प्रकार और वाहन के अनुसार तय की जा सकती है।

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2–4 यात्रियों के लिए

छोटे परिवार और कपल के बजाय परिवार-केंद्रित यात्रा के लिए सुविधाजनक प्राइवेट कार।

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5–7 यात्रियों के लिए

परिवार या छोटे समूह के लिए अतिरिक्त बैठने की जगह।

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बड़े समूहों के लिए

समूह के आकार के अनुसार उपयुक्त सीटिंग क्षमता वाला वाहन।

ध्यान दें: सटीक किराया और उपलब्धता यात्रा की तारीख, पिकअप-ड्रॉप स्थान तथा होटल की आवश्यकता के आधार पर पूछें।

कार के पैकेज में क्या शामिल है, यह बुकिंग के समय स्पष्ट करें। Govind Tour & Travels के निर्धारित ऑल-इंक्लूसिव कार कोटेशन में टोल, पार्किंग, ईंधन और ड्राइवर का खर्च शामिल किया जा सकता है। भोजन सामान्यतः पैकेज में शामिल नहीं होता, जब तक अलग से तय न किया जाए।

6. मथुरा-वृंदावन में होटल और रिसॉर्ट

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रुक्मिणी विहार में प्रेम मंदिर के पास ठहरने का विकल्प। परिवार के आकार के अनुसार डबल, ट्रिपल और बड़े कमरे की उपलब्धता पूछी जा सकती है।

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परिवार के साथ ठहरने के लिए रिसॉर्ट का विकल्प। पता: Romex International School, NH-19, मथुरा क्षेत्र।

होटल की उपलब्धता, कमरे का किराया और चेक-इन की जानकारी बुकिंग से पहले कन्फर्म करें।

7. मथुरा-वृंदावन यात्रा के लिए उपयोगी सुझाव

  • सप्ताहांत और त्योहारों पर मंदिरों में अधिक भीड़ हो सकती है।

  • मंदिरों के दर्शन समय और स्थानीय प्रतिबंधों की पहले जानकारी लें।

  • आरामदायक जूते और आवश्यक दवाइयां साथ रखें।

  • बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय पर्याप्त समय रखें।

  • गोवर्धन परिक्रमा और मंदिरों के आसपास स्थानीय यातायात प्रतिबंधों का ध्यान रखें।

  • होटल, कार और यात्रा कार्यक्रम की शर्तें बुकिंग से पहले स्पष्ट कर लें।

8. Govind Tour & Travels से मथुरा-वृंदावन टूर बुक करें

Vrindavan Sightseeing Taxi Hire

Govind Tour & Travels के साथ अपनी ब्रज यात्रा की योजना बनाएं। मथुरा, वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव के लिए अपनी आवश्यकता के अनुसार प्राइवेट कार और होटल का पैकेज पूछें।

  • प्राइवेट कार और समूह यात्रा के विकल्प

  • होटल और रिसॉर्ट में ठहरने की व्यवस्था

  • 2 दिन, 3 दिन और 4 दिन के यात्रा कार्यक्रम

  • मथुरा जंक्शन और निर्धारित स्थानों से पिकअप की सुविधा, उपलब्धता के अनुसार

बुकिंग और जानकारी के लिए संपर्क करें:

  • फोन: 9997026537

  • ईमेल: govindtoura@gmail.com

अपनी यात्रा की तारीख, यात्रियों की संख्या, पिकअप स्टेशन और कितने दिन का पैकेज चाहिए, इसकी जानकारी भेजें।

राधे राधे! जय श्री कृष्ण!

84 Kos Braj Yatra 2026 – Complete Braj Mandal Yatra Guide

 

84 कोस ब्रज यात्रा 2026: मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और ब्रज के प्रमुख तीर्थ स्थल

84 Kos Braj Yatra 2026 | Govind Tour & Travels Mathura

ब्रजभूमि भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीला स्थली है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव जैसे धार्मिक स्थान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। मान्यता के अनुसार, 84 कोस ब्रज यात्रा करने से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति और श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

यदि आप परिवार के साथ 84 कोस ब्रज यात्रा करना चाहते हैं, तो Govind Tour & Travels आपके लिए प्राइवेट कार और टेम्पो ट्रैवलर की सुविधा उपलब्ध कराता है।

84 कोस ब्रज यात्रा क्या है?

84 कोस ब्रज यात्रा ब्रज मंडल के विभिन्न धार्मिक स्थलों और भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमियों की परिक्रमा है। पारंपरिक रूप से ब्रज मंडल की परिक्रमा लगभग 252 किलोमीटर के क्षेत्र से संबंधित मानी जाती है। यात्रा का मार्ग और अवधि चुने गए तीर्थ स्थलों तथा श्रद्धालुओं की योजना के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

आमतौर पर पूरी ब्रज यात्रा के लिए 3 से 4 दिन या उससे अधिक समय की योजना बनाई जा सकती है।

84 कोस ब्रज यात्रा के प्रमुख दर्शनीय स्थल

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1. श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा

मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर तथा शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकते हैं।

Exploring Banke Bihari Mandir: A Spiritual Journey in Vrindavan - Vrindavan Darshan - A Glimpse of Kanha's Braj

2. वृंदावन धाम

वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं दिव्य लीलाओं से जुड़ा पवित्र स्थान है। यहाँ बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर, इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं।

Hindu God Golden Temples, Indian Temples, Photo of  Golden Hindu Temple India: Daan Ghati Temple - Mathura

3. गोवर्धन पर्वत और दानघाटी

गोवर्धन भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालु यहाँ दानघाटी मंदिर के दर्शन और गोवर्धन परिक्रमा करते हैं।

Vrindavan To Barsana Distance - 2 Best Routes, and Insider Travel Tips! - Mero Brajdham

4. बरसाना – श्री राधा रानी मंदिर

बरसाना श्री राधा रानी की लीला स्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित राधा रानी मंदिर ब्रज यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है।

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5. नंदगांव – नंद भवन

नंदगांव भगवान श्रीकृष्ण के पालन-पोषण और नंद बाबा से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ नंद भवन के दर्शन किए जाते हैं।

View of Shri Raman Bihari Temple at Ramanreti, Gokul - Braj.

6. गोकुल और रमण रेती

गोकुल भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा पवित्र स्थान है। रमण रेती भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

84 कोस ब्रज यात्रा कितने दिनों में पूरी होती है?

ब्रज यात्रा की अवधि आपके यात्रा कार्यक्रम पर निर्भर करती है।

  • 3 दिन: प्रमुख धार्मिक स्थलों का व्यवस्थित भ्रमण।

  • 4 दिन: अधिक तीर्थ स्थलों को शामिल करने के लिए सुविधाजनक विकल्प।

  • 5 दिन या अधिक: विस्तृत यात्रा, अतिरिक्त मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए।

ध्यान दें कि सभी 84 कोस यात्रा स्थलों को शामिल करने के लिए पहले से मार्ग और समय की योजना बनाना आवश्यक है। मंदिरों के समय, यातायात और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं के अनुसार कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।

84 कोस ब्रज यात्रा के लिए कार और टेम्पो ट्रैवलर

Govind Tour & Travels, Mathura के माध्यम से श्रद्धालु अपनी यात्रा के लिए समूह के अनुसार वाहन की व्यवस्था कर सकते हैं।

  • 2 से 4 यात्रियों के लिए स्विफ्ट डिजायर।

  • 5 से 7 यात्रियों के लिए अर्टिगा।

  • बड़े समूहों के लिए टेम्पो ट्रैवलर या उपयुक्त वाहनों की व्यवस्था।

वाहन की उपलब्धता, यात्रा मार्ग और कुल दूरी के अनुसार किराया तय किया जाता है। बुकिंग से पहले यात्रा की तारीख, यात्रियों की संख्या, पिकअप स्थान और यात्रा के सभी प्रमुख स्थलों की जानकारी अवश्य दें।

ब्रज यात्रा पर आने से पहले जरूरी बातें

  1. यात्रा की अवधि के अनुसार आरामदायक कार्यक्रम बनाएं।

  2. मंदिरों के दर्शन समय की पहले से जानकारी लें।

  3. बुजुर्ग यात्रियों और बच्चों के लिए पर्याप्त विश्राम का समय रखें।

  4. गोवर्धन परिक्रमा के लिए स्थानीय नियमों और वाहन प्रतिबंधों का ध्यान रखें।

  5. त्योहारों और भीड़ वाले दिनों में अतिरिक्त समय लेकर चलें।

84 कोस ब्रज यात्रा की बुकिंग कैसे करें?

यदि आप मथुरा से 84 कोस ब्रज यात्रा शुरू करना चाहते हैं, तो Govind Tour & Travels से संपर्क करके अपनी यात्रा के अनुसार वाहन और कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Govind Tour & Travels – Mathura, Vrindavan, Braj Yatra

  • सेवा: ब्रज यात्रा, मथुरा-वृंदावन दर्शन एवं प्राइवेट टैक्सी।

  • वाहन: स्विफ्ट डिजायर, अर्टिगा और टेम्पो ट्रैवलर।

  • मोबाइल नंबर: 9997026537

राधे राधे! जय श्री कृष्ण!


रविवार

जब मरेंगे तो भगवान की कृपा को प्राप्त करेंगे। मनुष्य जीवन का लक्ष्य ही यही है।

mahila katha vachak in vrindavan
Sadhvi Arya Pandit

जिस दिन आपको नियम टूटने पर सही में बुरा लगने लगेगा, उस दिन के बाद नियम टूटेगा ही नहीं।

मान लीजिए आप 500 रुपए के प्रॉफिट के लिए काम करते हैं लेकिन आपको मिला 450 रुपए ही तो आपको कैसा लगेगा। उस 50 रुपए के लिए आप सोचेंगे न की मेरा नुकसान हो गया और ध्यान रखेंगे की आगे से ऐसा घाटा न होने पाए। लेकिन क्या भजन के लिए हम ऐसा सोचते हैं।

अगर हम रोज दिन में 6 बार माला जपते हैं और आज न जपे तो इससे आपको कुछ नही होगा लेकिन यही यदि आपको एक दिन भोजन न मिले तो समझ में आ जाएगा।

भगवान के भजन को छोड़ सकते हैं कोई परेशानी नही, गुरु जी के नियम छोड़ सकते हैं कोई परेशानी नहीं लेकिन हमारा जिस पर महत्व है जैसे संसार के धन पर, संसार के भोगों पर, अगर उसकी थोड़ी सी हानि हो जाए तो हमारा चिंतन खिच जाता है, बर्दाश नहीं होता है।

मतलब आप धन और भोगों से अधिक भगवान का भजन नहीं मानते हैं अगर मान ले तो दिन में अगर भजन नहीं हो पाए तो रात को सोऊंगा नहीं, पहले उस नियम को पूरा करूंगा फिर सोऊंगा क्योंकि ऐसे हमारा नियम टूट जायेगा।

आप सोचेंगे कि आज नहीं किया, कल डबल करेंगे, पर मन तुम्हें फिसला देगा, न डबल होगा न सिंगल। मन बहुत शैतानी करने वाला होता है इसलिए इसे नियम से बांधना चाहिए। नियम जो ले, उसका निर्वाह करें। चाहे जैसी परिस्थिति आ जाए, नियम नहीं छोड़ना है, तभी भगवत प्राप्ति होती है, कोई भी बात तभी सफल होती है जब उसमें नियम हो।

हम लोग नियम का कितना आदर करते हैं। जब नियम का आदर करोगे तब तो नियम चल पाएगा न। लेकिन नियम का आदर ही नहीं है। जो नहीं खाना तो नहीं खाना, जो हमारे मार्ग में बाधक है, नही बात करनी।

हमें भजन करना है, धर्म से और परिवार का पोषण करना है, जितने दिन जिएंगे, नियम से जिएंगे और जब मरेंगे तो भगवान की कृपा को प्राप्त करेंगे। मनुष्य जीवन का लक्ष्य ही यही है।

अब कुछ नियम ही नहीं है, आज कसम खाई कल तोड़ दी, तो फिर फायदा क्या। जो नियम है ना कि मर चाहे जाओ, 24 घंटे में नियम लिया है, इतनी माला करने का, कुछ भी हो फिर चाहे भूखे रहें, सोए नहीं लेकिन माला पूरी करेंगे।

तो भगवान देख रहे हैं कि भजन के लिए आप कितने पाबंद है तो फिर वो भी कृपा करेंगे। अपने लोगों का क्या है, मनोरंजन स्वभाव है, दो माला घुमा ली, फिर नहीं लगा मन तो छोड़ दिए।

हमें पश्चाताप होता है क्या भजन छूटने में, जलन होती है, कभी रोए कि इतनी बड़ी हानी हो गई, हमारा भजन छूट गया? भजन के प्रति महत्व ही नहीं है, भगवान की तरफ प्रियता ही नहीं है, धर्म का महत्व ही नहीं हैं, नहीं तो रोने क्या एक मिनट के लिए भगवान के लिए याद भूल गई तो मन व्याकुल हो जाए, तड़पने लग जाते।

हमारी बहादुरी से हम अपने मन को चेला बनाकर भगवान का बना दे, तो हम बहादुर है।

arya pandit
Sadhvi Arya Pandit

जैसे फूल में पराग आ जाता है तो भौरें मंडराने लगते है। ऐसा ही जब भगवान की कृपा होती है भक्ति का प्रचार अपने आप होता है। मतलब भक्ति में तो मुझे जुड़ना है और उसका प्रचार अपने आप हो रहा है। अगर हम प्रचार करने उतरेंगे तो माया इतनी बलवान है कि फिसल के वहां खड़ा कर देगी, जहां हमारे अंदर भक्ति ही नहीं रह जायेगी।

अपने को ठसाठस भक्ति में भर लो। भगवान कहते हैं कि जो मेरी भक्ति से युक्त हैं वो त्रिभुवन को पावन कर सकता है। ये कोई बुद्धिगत नहीं है कि हम किसी को बदल सकते हैं।

हमारी बहादुरी से हम अपने मन को चेला बनाकर भगवान का बना दे, तो हम बहादुर है। हम दूसरों को तो उपदेश दे सकते हैं पर अपने मन को चेला नहीं बना पाए। जब हम अपने मन को उपदेश देकर सही मार्ग पर नहीं चला पाए तो हम दूसरों का क्या कल्याण कर लेंगे।

अगर हमने खीर बनाकर खुद पाई नहीं और रोज खीर का प्रवचन कर रहे हैं तो वो खीर का प्रवचन किसी को नहीं लुभाएगा। पहले डटकर बनाओ और पेट से गले तक पाओ और पचाओ। जब पच जाएगा तब आप खीर का वर्णन करोगे तब आपके मुंह की मुस्कुराहट, पाने का स्वाद दूसरों को आकर्षित कर देगा।

ऐसे ही हम भगवतानंद की बातें तो बहुत करते है पर जब तक खुद भगवतानंद को महसूस नहीं किया तब तक किसी पर प्रभाव नहीं पड़ेगा इसलिए पहले खुद को समर्थ बनाओ।

अध्यात्म में जनकल्याण स्वयं होता है, किया नहीं जाता। जब आप खुद से न महसूस कर लें कि, हे हरि! मैं तो किसी योग्य नहीं, मैं तो आपका एक तुच्छ दास हूं, तब योग्यता आएगी जन कल्याण की। और जब हम जान कल्याण करने उतरेंगे तो देखेंगे कि जन है ही नहीं, क्योंकि उसको सब जगह ही श्री हरी दिखाई देंगे।

तो बात यहां यह समझनी है कि अपना चश्मा ठीक करना है और अपना हृदय भक्ति से भरना है फिर सब मंगल ही मंगल होगा।

कथा व्यास- "साध्वी आर्या पंडित" श्रीमद् भागवत कथा वक्ता 86501 21385 वृन्दावन, ज़िला - मथुरा

गृहस्थी में माया क्या सताती है? मेरा शरीर, मेरी पत्नी, मेरे बच्चे और कुछ ऐसी व्यवस्था हो जाए

sadhvi arya pandit
Sadhvi Arya Pandit


सिर्फ गृहस्थ जीवन में नहीं, भगवत मार्ग पर भी माया बहुत परेशान करती है। आप क्या सोचते हो की यह केवल गृहस्थी को ही परेशान करती है पर ऐसा नहीं है, वो तो धज्जियां उड़ा देती है, अभी आपने देखा नही है न क्योंकि आप गृहस्थी में रहते हो।

यह चढ़ते हुए को घसीट के रौंदते हुए हजारों हाथ नीचे दबा दे। अगर कोई बच सकता है तो केवल भगवान की शरणागति से। यहां ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि काम नहीं करती।

परंतु जिसकी बुद्धि भगवान के चरणों में अर्पित है वही जीत सकता है। ऐसा नहीं होता है कि केवल गृहस्थ में माया सताती है विरक्ति में नहीं बल्कि यह गृहस्थी में कम सताती है विरक्ति में ज्यादा सताती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि गृहस्थी तो चार दिवारी के अंदर है न और विरक्ति मतलब वो उस लाइन से बाहर निकल गया और उसे वापिस से लाइन में लाना है। जैसे कोई योद्धा शत्रु पक्ष की ओर चला गया तो उसे पुनः लाइन में लाना होगा।

लेकिन माया उसके लिए पूरा जोर लगा देगी कि हमारी अधीनता से तुम बाहर कैसे जा रहे हो और उसके जोर को जो सह गया, उसी को महात्मा कहते है।

गृहस्थी में माया क्या सताती है? मेरा शरीर, मेरी पत्नी, मेरे बच्चे और कुछ ऐसी व्यवस्था हो जाए कि खाए, पिए आनंदपूर्वक रहने और घंटा दो घंटा आरती पूजा भी भगवान की करते रहें। सात्विक पुरुषों के अंदर, सबके अंदर यही भावना है कि हे भगवान! भले हमे तुम कुबेर का खजाना मत दो पर इतना हो कि समाज में प्रतिष्ठा बनी रहे, परिवार स्वस्थ रहे। पर ऐसा होगा नहीं, न किसी के साथ होता।

क्योंकि दो कर्मों से हमारा शरीर रचा गया है– पाप और पुण्य। जब पाप का फल आएगा तो भयंकर आएगा। रोग, दुःख, विपत्ति, नाना प्रकार के संकट और जब पुण्य का फल आएगा तो उत्साह, आनंद, उत्सव आदि सब चलेगा। ये दोनों ही चलेंगे जैसे दिन और रात। इसलिए कोई भी ऐसा नहीं है जिसके जीवन में दुःख न आया हो। इस श्रेणी में भगवान ही क्यों न प्रकट हुए और दुःख न आया हो, ऐसा तो नहीं।

हमें तो उतना दुःख आया ही नहीं है जितना भगवान के अवतार लेने पर उनको दुख आया है– चाहे वो कृष्ण अवतार हो या राम अवतार हो। भगवान ने अवतार लेकर बताया है कि दुःख और सुख दोनों चलते रहेंगे।

एक सुख ऐसा भी है जहां इन दोनों का प्रवेश नहीं है उसे कहते हैं भगवतानंद, जो दुख सुख से परे है। जो सुख दुख में समान, लाभ हानि में समान, अजय पराजय में समान, वो परम सुख भगवान का है।

तो अगर गृहस्थी में रहकर भी नाम जप किया जाए, भगवान की आराधना की जाए और यह भाव रखा जाए कि हम भूखे हैं तो आपकी मर्जी, छके है तो आपकी मर्जी, आप जैसे दिला रहे हो, हम राजी है, तो माया पार हो जाओगे।

उनसे मांग ज्यादा रखने से माया पार नहीं होने वाली। वो आपके भजन साधनों से मांग तो पूर्ण कर देंगे लेकिन उसका क्या फायदा। इसलिए भगवान से यह मांगे कि मेरा यह जीवन और इस जीवन के बाद जिसमें मंगल हो वही करना। भले मैं कुछ भी मांगना रहूं, मत देना।

जब हम भगवान के शरण में होंगे, हमें कोई माया परेशान नहीं कर सकती।

कथा व्यास- "साध्वी आर्या पंडित" श्रीमद् भागवत कथा वक्ता 86501 21385 वृन्दावन, ज़िला - मथुरा

मंत्र जप करें या नाम जप, जानिए "साध्वी आर्या पंडित"

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Sadhvi Arya Pandit


फल पर दृष्टि रखना छोड़ दो। हमको सबसे बड़ा फल यह देखना है कि आराध्य देव से मन जुड़ा हुआ है या नहीं।

हमारी जीभ्या, हमारी सर्वेंद्रियां, हमारी चेष्ठा आराध्य देव से जुड़ी हुई है या नही। जिसका लक्ष्य अखंड स्मृति होता है वो इन सब बातों को नहीं देखता। वो देखता है कि हम पद गा रहे हैं तो उनका गा रहे हैं, सेवा कर रहे हैं तो उनकी कर रहे हैं, नाम जप रहे हैं तो उनका कर रहे हैं, नृत्य कर रहे हैं तो उनके लिए कर रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं तो उनके लिए कर रहे है। उनसे जुड़ना परमंगल है।

संसार से जुड़ना परम् हानिकारक है। मेन चीज समझनी है कि लक्ष्य पर रहिए तो कभी दुख नहीं होगा, नहीं तो वाचिक जपने से 100 गुना फल उपान्स में है। उपान्स जपने से हज़ार गुना फल मानसिक में है। मानसिक कुछ होता नहीं, तो हो गया फल खत्म।

हम अगर फलों की तरफ दृष्टि रखेंगे तो हमारा भजन सही नहीं हो पाएगा। हमें दृष्टि रखना है आराध्य देव से चित्त जोड़ना है। एक एक वृत्ति प्रभु में जुड़ रही है यही हमारा वर्तमान का फल है।

हम प्रभु का स्मरण कर रहे है, प्रभु का नाम जपते हुए, लीला गहन करते हुए, सेवा करते हुए, हमें यही चाहिए और स्मृति का जो फल होता है वो बहुबंधन से मुक्त होकर भगवान की सेवा में जाना होता है।

उनका नाम, उनका रूप, उनका गुण, उनका लीला ही हमारे चिंतन में चल रही है, बस हमें और कुछ नहीं चाहिए। भगवत स्मृति ही साधना का सार है। हर समय स्मरण में डूबे रहे, इससे बड़ी सिद्धि क्या होगी।

अगर हम सोचते रहेंगे कि पवित्र अवस्था नहीं है, मंत्र जप सकते नहीं, नाम का फल वो है नहीं, तो नाम में अश्रद्धा हो गई, मंत्र जपने का समय नहीं तो सब गड़बड़ हो जायेगा।

हमें प्रभु से जुड़े रहना है। हमारी चित्त वृत्ति प्रभु में जुड़ी रहे। वो नाम के द्वारा, गुण के द्वारा, मंत्र के द्वारा हम प्रभु से जुड़े रहें। ये बात ध्यान रखोगे तो बहुत आनंद रहेगा।

फल में रस होता है और हमारी दृष्टि रस में रहे। रस है प्रिया प्रीतम प्रभु और अगर फल पर दृष्टि रहेगी तो बड़ा कन्फ्यूजन होगा कि इसका फल ये होगा, उसका फल वो होगा, अब ये करना चाहिए पर हो नहीं रहा तो बड़ा परेशान है।

अगर नहीं भी वृद्धि हो रही है तो हम प्रभु के हैं, प्रभु से जुड़े हुए हैं, बस इतने से सर्वमंगल हो जाएगा।

"साध्वी आर्या पंडित" श्रीमद् भागवत कथा वक्ता 86501 21385 वृन्दावन, ज़िला - मथुरा

शास्त्र के अनुसार भगवान आदेश करते हैं कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए।

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Sadhvi Arya Pandit

किसने कहा कि घर छोड़ना चाहिए, माता– पिता को छोड़ दो। शास्त्र के अनुसार भगवान आदेश करते हैं कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए।

दो मार्ग है– एक है प्रवृत्ति मार्ग और दूसरा है निवृत्ति मार्ग। निवृत्ति मार्ग का अर्थ है सन्यास मार्ग। इस मार्ग पर जब हम चलते हैं तो माता पिता को प्रणाम करके, उनसे अनुमति लेकर आजीवन उनसे न मिलने का वैराग्य लेते हैं।

जिस दिन से जन्म भूमि से निकले, सब खत्म। माता पिता, भाई बहन, बंधु परिवार अब हमारे भगवान के अलावा कोई नहीं। जिस रसोई में बचपन में खेलते हुए भोजन खाया, उससे निकले तो आज तक उस रसोई में कौरा नही तोड़ा।

जिस मां ने पालन पोषण किया, उसी मां के आशीर्वाद से निकले। वो पधारी, क्या हुई जीवन में नहीं देखा। यह है हमारा निवृति मार्ग।

लेकिन गृहस्थ मार्ग पर चल रहे हैं तो माता पिता को भगवान मान कर उनकी सेवा करते हुए खूब नाम जप करो, वहीं भगवत प्राप्ति होगी। ऐसा नहीं है कि प्रवृत्ति मार्ग पर चलोगे तो ही भगवत प्राप्ति हो।

स्वभाव के अनुसार भगवान सब जीव को मार्ग देते हैं। हमारे कुछ पूर्वज का भजन ऐसा रहा होगा कि भगवान ने हमें इस राह पर चलने के लिए रास्ता दिखाया।

पर निवृति मार्ग पर चल कर जो फल मिलता है वो फल तुम्हे प्रवृत्ति मार्ग पर चल कर भी मिल जायेगा। बस अपने माता पिता को भगवान मानो, खूब सेवा करो, कमाओ खाओ, उनको दुलार करो, समाज सेवा में उतर कर आओ और नाम जपने का निरंतर अभ्यास करो, ऐसे भी भगवत प्राप्त हो जाओगे।

जब हम वैराग्य की बात करते हैं तो उनके लिए कहते हैं जिन्होंने वैराग्य पाठ का चयन कर लिया है, जो वैराग्य में चल रहे हैं, जो आगे बढ़ गए हैं। कदम आगे बढ़ गए तो पीछे लौटना नहीं है, चाहे जो हो जाए।

लेकिन आप जिस वेश में हो, उसी के अनुसार चलना चाहिए। इसलिए आपको तो किसी ने आज्ञा नहीं दिया है कि माता पिता को छोड़ दो। अब अगर कोई मनमानी आचरण करे तो किसी का कहां बस है किसी पर।

इसलिए लोगों की कही सुनी पर मत जाइए। अपने मन की सुनो और अपने मार्ग पर चलते जाओ।

"साध्वी आर्या पंडित" 
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता,
वृन्दावन, ज़िला - मथुरा - 86501 21385




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