सीटी वैल्यू क्या है?
सैंपल में वायरस है की नहीं, इसका पता लगाने के लिए चेन रिएक्शन की साइकिल बार-बार दोहराई जाती है। इसी को कहते हैं सीटी वैल्यू। सीटी वैल्यू का फुल फॉर्म है- साइकिल थ्रेशोल्ड वैल्यू, जो की एक नंबर होता है।
सीटी वैल्यू निकलते कैसे हैं?
आईसीएमआर ने सैंपल में कोरोना वायरस के लिए सीटी वैल्यू 35 रखी है। इसका ये मतलब है कि हम अगर 35 बार चेन रिएक्शन की साइकिल चलवाते है और इस 35 साइकिल चलाने में कोरोना वायरस का पता चल जाए, तो इसका मतलब होगा की आप कोरोना पॉजिटिव हैं। और अगर 35 साइकिल घूमने पर भी वायरस ना मिले तो टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव है।
अब आपको ये लग रहा होगा कि क्या सभी टेस्ट सैंपल में 35 बार चेन रिएक्शन होता है? तो इसका जवाब ये है नहीं, ऐसा होना जरूरी नहीं। क्योंकि कई सैंपल में तो 8- 10 साइकिल में ही वायरस का पता चल जाता है, जबकि कई सैंपल में तो 22-25 या 32 साइकिल के बाद वायरस का पता चल पाता है।
कैसा सीटी वैल्यू होना अच्छा होता है?
अगर सैंपल में 8-10 साइकिल में ही वायरस का पता चल जाता है, तो इसका मतलब है कि वायरल का लोड ज्यादा है। और अगर 20-32 साइकिल में वायरस का पता चल रहा है, तो इसका मतलब है की व्यक्ति में वायरल का लोड कम है।
अगर वायरस 10 साइकिल में मिला, तो उसकी सीटी वैल्यू 10 होगी और अगर 35 साइकिल में मिला तो सीटी वैल्यू 35 होगी।
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