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| Sadhvi Arya Pandit |
सबसे पहले सबको चाहिए की भगवान को गुरु पद में बैठा लें। श्री कृष्ण, श्री राम, श्री शकंर ही सदगुरु रूप हैं ।
सबसे पहले भगवान को सतगुरु रूप में स्मरण करें, फिर उनसे प्रार्थना करें कि प्रभु प्रकट रूप में हमें आपका सानिध्य चाहिए। अब आप हमें किस रूप में स्वीकार करते हैं, बड़ी शीघ्र कृपा करके हमें वहां पहुंचा दीजिए या आप स्वयं आ जाइए।
विद्यार्थी कभी टीचर को समझ नहीं सकता, ऐसे ही हम संसारी जीव कभी सतगुरु संत की महिमा को नहीं समझ सकते। वो किस स्थित में कहा पहुंचे हुए हैं वो सत्य है या पाखंड है। दोनों बातों का ज्ञान हमें नहीं है तो जिसको ज्ञान है वो भगवान है।
उन्हीं से हम प्रार्थना करें कि आप कृपा करके अपने सद्गुरु रूप में हमें आशक्त कर दीजिए। कहां हो, कैसे हो, हम तो समझ नही पा रहे। या आप आ जाओ या हमें अपने पास बुला लो क्योंकि गुरु भगवान ही है।
अब बात आती है की गुरु का चयन कब करना चाहिए तो जिस दिन हमारे हृदय में बात आ जाए की जीवन का लक्ष्य श्री भगवान को प्रसन्न करना है, उसी दिन गुरु का वरण कर लें। हमारे परमब्रह्म परमात्मा ही हमें गुरु रूप में आकर हम जीव को अज्ञान रूपी दलदल से हटा कर, शुद्ध ज्ञान, शुद्ध प्रेम प्रदान करते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता वृन्दावन, ज़िला - मथुरा

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