शनिवार

नौकरी, दुकान, व्यापार करते हुए रखें इन बातों का ध्यान, अवश्य भगवान मिल जाएंगे!

 

Sadhvi Arya Pandit
Sadhvi Arya Pandit



नौकरी, दुकान, व्यापार करते हुए रखें इन बातों का ध्यान, अवश्य भगवान मिल जाएंगे!

हम लोग भजन का मतलब समझते है कि एकांत गुफा में बैठकर किया जाता है या एकांत कमरे में किया जाता है उसे ही भजन कहते हैं। ये भी भजन का एक अंग है लेकिन उसे सांगोपांग भजन नहीं करते हैं। सांगोपांग भजन में पहले ये स्वीकार किया जाता है कि सम्पूर्ण श्रृष्टि श्री भगवान की है।

हम इस श्रृष्टि में भेजे गए हैं अलग अलग सेवाओं के लिए। कोई डॉक्टर है, कोई मास्टर है। विविध प्रकार के अभिनय करके हम को स्वामी से इनाम लेना है। अगर शिक्षक ने भागवत भाव से बालकों को पढ़ाया तो वो भजन ही है।

ऐसे ही एक युद्ध क्षेत्र में खड़ा हुआ सूर्यवीर सामने खड़े सैनिक को मार कर देश की रक्षा करता है, उसका वो भजन ही है और भजन से कम नहीं। क्योंकि वो अपने धर्म के लिए युद्ध में वार कर रहा है।

अधर्म से किया हुआ हर कार्य निष्फल है और धर्म से किया हुआ हर कार्य भजन है क्योंकि ये श्रृष्टि भगवान की है। हमें ये समझना होगा कि हमें जो अभिनय मिला है उसमे बेईमानी न करें। अगर आप सत्यता से चलेंगे, वही आपका भजन बन जाएगा। उसी से भगवान प्रसन्न हो जाएंगे।

लेकिन अगर आप में अपने अभिनय को लेकर अभिमान आ गया तो उपासना की वृत्ति का नाश हो जाना है। इसलिए एक छोटा सा कार्य भी आपको भगवत प्राप्ति करा सकता है। अगर हम सब अपने धर्म से चलें, अपने कर्तव्य को ही भगवान की पूजा मान लें। तो जो जहां है उसको अलग से कोई मार्ग चयन नहीं करना पड़ेगा और उसे वही से भगवान की प्राप्ति होगी।

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