आपसे पूछा जाए कि आप टीचर क्यों बने, डॉक्टर क्यों नहीं बने। तो जब आप असलियत में देखोगे कि मुझे भगवान ने बना दिया है।
मतलब यह कि आपको भगवान ने बनाया है तो आप भगवान की मान कर सेवा कीजिए। भगवत प्राप्ति में जो एक योगी को भगवत प्राप्ति होती है, वही एक गृहस्थ को भगवत प्राप्ति होती है। पर वह अपने धर्म से चले क्योंकि हम सब भगवान के सेवक हैं, सब को अलग-अलग सेवा विभाग दिया है।
पूरे विश्व में जिसको जो कार्य मिला है उसे भगवान का समझकर सच्चाई से करें तो भगवान प्रसन्न हो जाएंगे क्योंकि भगवान ने ऐसा ही उपदेश किया है। भगवान का स्मरण रहे और आप अपने कर्तव्य को सच्चाई से करें, इसी से भगवान प्रसन्न हो जाएंगे और भगवत प्राप्ति हो जाएगी।
"साध्वी आर्या पंडित"
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता,
वृन्दावन, ज़िला - मथुरा - 86501 21385

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