रविवार

दूसरों को कैसे विश्वास दिलाएं कि मैं सही मार्ग पर हूं?


arya pandit
Sadhvi Arya Pandit


ऐसा कभी नही हो सकता कि हम सभी को यह विश्वास दिला पाएं कि हम सत्य मार्ग पर चल रहे हैं। हमको अपने हृदय को साक्षी करना है, किसी और को नहीं, कोई और राज़ी हो या न राज़ी हो। इस मार्ग के प्रति ऐसा नहीं होता कि चार लोग बड़ाई करें तभी मार्ग सच्चा है।

यह मार्ग ऐसा नहीं है कि परिवार वाले, गांव वाले, नगर वाले, देश वाले हमारा सपोर्ट करे कि वाह! तुम परमार्थ पर बैठ जाओ घर में। इस तरह परमार्थ पर मत चलना, ऐसे परमार्थ पर नहीं चला जाता।

परमार्थ पर चला जाता है, चाहे सब विरोध करें, हमारे प्राण भी हमारा त्याग कर दें पर आज से हम प्रभु को अपना मानते हैं। हम भजन मार्ग पर चलेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए, तब चला जाता है इस मार्ग में।

हमारी आपकी भक्ति कितनी सामर्थशाली है यह प्रभु जाने, लेकिन मीरा जी की भक्ति जगत जानता है कि कितनी सामर्थशाली है। लेकिन उनका देवर ही विश्वास नहीं करता था की इनका मार्ग सत्य है। संतों के बीच बैठने पर लांछन लगाता था, ज़हर दिया, मारने की बहुत प्रकार की चेष्टा की, तो फिर औरों की बात क्या।

हिरणकश्यप इतना तेजस्वी, तपस्वी, शक्तिशाली है और प्रहलाद जी का विरोध कर रहा था, घर घर में विरोध हुआ, देश, नगर, विरोध करे तो यह कौन सी बात है। हर विरोध हमारे मंगल के लिए है क्योंकि हमारा स्वभाव चिपकू है। चित्त वृत्ति जहां आ जाती है जिस व्यक्ति में, जिस विषय में, वहां आशक्त हो जाती है।

भगवान की बड़ी कृपा है कि कोई अपना कहलाने वाला न रहे, कोई हमें प्यार ना करे, सब जगह से हमें दुत्कार मिले तो हम अशरण हो जाएं और अशरण हो गए तो शरणागति प्राप्त हो जाएगी।

तो यह तो भगवान की कृपा है पर यह भाव बिल्कुल गलत है कि कोई हमारा सम्मान करे, सपोर्ट करे, हमारा यश गाए, तो इसमें तो फिर परमार्थ पर चला ही नहीं जा सकता। यह परमार्थ का स्वरूप नही हैं।

हमें चुपचाप आगे बढ़ना है, जो व्यवस्था हमारे ठाकुर जी कर रहे हैं वो हमें चाहिए। अगर हमको गाली मिल रही है, इसका मतलब अभिमान बकाया है तो भगवान उसको भी रौंद देंगे। जब तक अहंकार निर्विष्य नहीं हो जाता, रेत नहीं हो जाता, तब तक भक्ति का रंग नहीं चढ़ता।

कभी कभी भगवान अपने बड़े बड़े भक्तों को भी पिटवा के देखते हैं। जैसे कुम्हार बाजार में अपनी मटकी को पीट कर दिखाता है क्योंकि उसने उसे बनाया है और तपाया है। इसलिए कहता है कि ठोक बजा के देख लो, कितना भी आप पानी डालो, इससे रसेगा नहीं।

ऐसे ही ठाकुर जी, हमारा प्रेमपात्र पक्का हो गया है या नहीं, यह बजा कर दिखा देते हैं। भक्तों ने अपार कष्ट देखा परंतु कदम पीछे नहीं हटाया। तो आज हम उनका यश गाते हैं इसलिए हम लोगों को कमज़ोर नहीं होना चाहिए।

"साध्वी आर्या पंडित" 
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता,
वृन्दावन, ज़िला - मथुरा - 86501 21385

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