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| Sadhvi Arya Pandit |
ये सभी चीजें होने के कई कारण होते हैं। पूर्व के पाप, वर्तमान का अज्ञात और भगवत विमुखता। प्रभु का आश्रय लेकर भगवत सम्मुख हो जाओ। जो भी व्यापार, नौकरी कर रहे हो वो भगवान का नाम लेकर उनको अर्पित कर दो, यह सेवा भी तो भगवान की है। तभी आपको आनंद मिलने लगेगा।
हम लोग प्रभु से विमुख हो गए हैं, ऐसे आचरण के हो गए कि हमारे वो कर्म जमा है जो हमको भय दिलाते हैं, विषाद दिलाते हैं, दुख दिलाते हैं। हमारे उन जमा कर्मों को भगवान ही खत्म कर सकते हैं।
आगे के कर्मों को हम उनकी कृपा से सुधार सकते हैं। वर्तमान में जो संकट आ रहा है। उसे विवेक के द्वारा हम सह सकते हैं परंतु मिटा नहीं सकते। पूर्व जमा कर्मों को भगवान मिटा देंगें।
आगे कोई गलती न हो वो आप भगवान की कृपा से सावधानी से चलें। अगर कष्ट आया तो विवेक के द्वारा सहो लेकिन यह जो भय विषाद है यह तब तक नहीं मिटेगा जब तक भगवत साक्षात्कार नहीं होगा, भगवत आश्रय नहीं होगा, भगवत भजन नहीं होगा, कुछ भी कर लो, कितना चाहे कमा लो लेकिन कभी विषाद नहीं हटेगा, कभी विश्राम नही मिलेगा, माया की भूख बढ़ती ही चली जाएगी।
भय, शोक, चिंता घेरे ही रहेंगे इसलिए भगवान की शरण में होकर उनकी लीला कथाओं को पढ़ो, सुनो, ठाकुर की सेवा करो उनके आश्रित हो तो सब सही होगा।
हमसे अंजाने में बहुत बड़े बड़े पाप हो जाते है। जैसे घर में लड़की नहीं चाहिए इसके लिए अल्ट्रासाउंड करवा के गर्भ में ही उसको मरवा दिया। यह ऐसा पाप है कि इससे ऐसे रगड़ोगे की कोई बचा नही पाएगा।
भ्रूण हत्या को कुछ माना ही नहीं जा रहा है। यह एक प्रणाली सी मान ली गई है। अगर तुम्हारे आंगन में खेलता हुआ बच्चा तुम्हें आकर थप्पड़ मार दे, कैसा लगेगा तुमको। तुम जल जाओगे, क्रोध में आ जाओगे। ऐसे ही जो तुम्हारे गर्भ में पल रहा है और तुम उसको नष्ट कर दो तो तुम्हें दुख नहीं होता। वो जो पाप आएगा न, तुम्हें नष्ट कर देगा।
तो कई ऐसी गलतियां होती हैं जिनको हम समझ नहीं पाते लेकिन अपराध बन जाते हैं। भगवान की शरण में होकर भजन करो, जिससे हमारे पाप नष्ट हो जाएंगे, नहीं तो जीवन में शांति, सुख, रुपया पैसा से नहीं मिलती, चाहे जितना जमा कर लो। अशांत और क्लेश देता ही रहता है।
किसी के कलावा बांधने से, प्रसाद बाटने से शोक दूर होने वाला नहीं। जब तक तुम्हारे अंदर ज्ञान प्रकट नहीं होगा तब तक ये अज्ञान, माया तुमको रौंदती ही रहेगी। यह जन्म इसलिए ही मिला है कि ज्ञान प्राप्त करो, भगवान की भक्ति करो और पापों से बचो तो आनंद मिल जायेगा।
आजकल पाप से बचने वाला दिमाग है ही नहीं। बस हमको रुपया पैसा मिलना चाहिए, सुख मिलना चाहिए, आनंद मिलना चाहिए लेकिन हमारे कर्म विपरीत हो रहे हैं और फल विपरीत चाह रहे हैं। बबूल लगाओगे तो आम नहीं मिलेगा।
अगर आपके कर्म ठीक हैं, भगवताश्रय है तो फल ठीक है और अगर कर्म खराब हो तो आपको वो फल मिलेगा। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है, जितना समय बचा है काम बना लो।
भगवान का आश्रय लेकर भगवान का भजन करो, वो सब ठीक कर देते हैं। वो हर गलती को माफ कर देते हैं। अगर वो कृपालु न हो तो हम लोगो का कभी उद्धार न हो। क्योंकि ऐसे ऐसे पाप बन जाते, आचरण हो जाते हैं जो नही होना चाहिए इसलिए भगवान ही क्षमा कर सकते है। भगवान की तरफ चलो, तो वो क्षमा करके आनंद प्रदान कराएंगे।
"साध्वी आर्या पंडित"
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता,
वृन्दावन, ज़िला - मथुरा - 86501 21385

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