| Sadhvi Arya Pandit |
जिंदगी का कोई भरोसा नहीं कि शाम तक जिएंगे की नहीं जिएंगे। जिंदगी में कहां ऊंचे जाओगे, जहां भी ऊंचे जाओगे, पटक दिए जाओगे।
माया का काम है ऊंचे से नीचे पटकना। छोटे बन जाओ, कभी नहीं पटके जाओगे। भजन से क्या होता है, जानते हो? छोटा बना जाता है! अब कोई पटक के दिखाए।
मान लो तुम सीधे चित्त पड़े हो, अब तुम्हें कौन चित्त करेगा क्योंकि तुम पहले ही चित्त हो। अगर तुम्हारी इच्छा है कि कहीं ऊंचे पर चढ़े, तो इसके लिए तुम्हारी पकड़ बहुत अच्छी होनी चाहिए। अगर फिसलोगे तो हड्डी टूट जायेगी। यह ऊंचाई की चाह ही उसको नष्ट कर देती है।
रोज़ भगवान का भजन करते रहो, वो जहां पहुंचा देंगे, वहां से गिरने का कोई चांस नहीं। यही तो माया का खेल है कि वो बड़ा बनाना चाहता है, हर क्षेत्र में बड़ा बनाना चाहता है। यह दोष भी नही है क्योंकि वो बहुत बड़े का बच्चा है! भगवान का बच्चा है और भगवान तो सबसे बड़े हैं इसलिए वो सबसे बड़ा बनना चाहता है।
परंतु इस मार्ग में सबसे बड़ा बना जाता है सबसे छोटा बनकर। जो जितना छोटा बन गया, वो उतना ही बड़ा बन गया। तो सच्ची बात समझो, आप अपने आप को छोटा समझकर काम करो, तो देखना आप सबके पूज्य बन जाओगे।
लेकिन हमारी गलती क्या होती कि हमारे अंदर का अहंकार बड़ा होता है और अहंकार का काम है नाश करना, पतन करना। अहंकार बड़ा कष्टदायक है। हम समझ नही पाते, दुश्मन का साथ देते है और वही हमें मार देता है। छोटा होने से अहंकार नष्ट होता है और जहां अहंकार नष्ट होता है तो वो भगवान की कृपा का पात्र बन जाता है और सर्वमंगल हो जाता है।
भगवान से यह प्रार्थना करो कि आप जैसा भी बनाओ, जो भी बनाओ, अपना बना लो। सबसे बड़ा पद है भगवान का। हम किसके हैं? भगवान के हैं और माया किनकी है भगवान की है।
इसलिए जब आप भगवान से मिलते हो तो माया की चैकिंग बंद हो जाती है, फिर आप चाहे जिनको ले जा सकते हो। संत जनों के पास जो जुड़ते है वो संत जन डब्बा हैं। अगर कनेक्शन हटा दो तो डब्बा चलेगा क्या। इंजन है अचार्य भगवान।
पर इंजन में इतने लोग पार नहीं कर पाते जितने डब्बा में पार हो जाते हैं। इंजन में दो चार लोग बैठते होंगे और डब्बे में सैकड़ों बैठते हैं पर पावर डब्बा में कुछ नहीं है। अगर कनेक्शन इंजन से टूटता है तो वो वहीं खड़ा रह जायेगा।
इंजन है भगवान और हम सब है डब्बा। जब उनसे कनेक्शन है तो पार हो गए और अगर उनसे कनेक्शन हटा, वही खड़े रह जाओगे। अगर हम भगवान से विमुख है तो उसका परिणाम कुछ नही है और अगर हम भगवान के है तो हमारी बहुत बड़ी उन्नति है।
ये जीवन जैसे बना है कटेगा लेकिन हम अंत में भगवान के पास जायेंगे, अपने प्रभु से मिलेंगे। हमारा जन्म मरण छूट जायेगा और सदा सदा के लिए परमानंद हो जाएंगे।
उन्नति इसमें है कि हम भगवान के चरणों का आश्रय लेकर, उन पर भरोसा रखकर कार्य करें, चाहे वो जो भी हो पढ़ाई – लिखाई, नौकरी, व्यापार।
उसमें अगर हम सफल होते है तो श्री जी की जय हो और फेल होते है तो भी श्री जी की जय हो। कोई मंगल विधान होगा श्री जी का, ऐसी भावना से अगर भक्त चलता है तो वो विजय को ही प्राप्त होता है।
तो अगर हम धर्म से चलें तो वास्तविक उन्नति मिलेगी। थोड़ा कष्ट तो हो सकता है पर वो भी हमारे पाप है जिनका नाश हो रहा है।
ऐसा नहीं है कि भगवान हमें वो कष्ट दे रहे हैं। वो हमारे पूर्व के लिए हुए पाप है और जब उनका नाश हो जायेगा तो हमारे वर्तमान में किए हुए पुण्य, सुकृति हमें मंगलमय कर देंगे। इसलिए उन्नति भगवान के चरणों पर समर्पित होने पर है।
"साध्वी आर्या पंडित"
श्रीमद् भागवत कथा वक्ता,
वृन्दावन, ज़िला - मथुरा - 86501 21385
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